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Monday, May 20, 2024

प्रकृति पर्व ‘सरहुल’ 2024

11अप्रैल,2024 को आदिवासी समाज का सबसे बड़ा प्रकृति पर्व ‘सरहुल’ पूरे झारखंड में धूमधाम से मनाया जायेगा

सरहुल उत्सव की खासियतें: आदिवासी मुंडा, भूमिज, कोल, हो और संथाल लोग इस त्योहार को हर्ष और उल्लास के साथ मनाते हैं। पूरे उत्सव के दौरान गांव की गलियों में नृत्य किया जाता है, जिसमें आदिवासी पुरुषों, महिलाओं और बच्चों भी भाग लेते हैं। इसके साथ ही, सरहुल के उत्सव में विविधता भी है – गाने, नृत्य, और रंग-बिरंगे वस्त्रों में सजी गुजरता है।

पूजन और परंपरा:

सरहुल में पूजा और परंपरा का महत्वपूर्ण स्थान है। इस उत्सव में साल (सखुआ) वृक्ष के फूलों, महुआ के फलों, और फूलों की पूजा की जाती है। जायराथान या सरनास्थल पर पूजा के लिए उपयुक्त स्थान चुना जाता है, जहां लोग देवताओं की विशेष पूजा करते हैं। यहां पाहान या लाया नामक पुजारी देवताओं की पूजा करते हैं और देउरी (सहायक पुजारी) भी साथ होते हैं।

पुरानी परंपराएं:

इस पर्व के दौरान भी कई पुरानी परंपराएं अनुसरण की जाती हैं। एक परंपरा है कि जब पुजारी मुर्गी के सिर पर चावल अनाज डालता है, तो इसे उठाने पर अगर मुर्गी भूमि पर गिर जाती है और चावल खा लेती है, तो यह समृद्धि और सफलता की संकेत मानी जाती है। इसके विपरीत, अगर मुर्गी नहीं खाती, तो आपदा की संभावना होती है। इसके अलावा, आने वाले मौसम के लिए पानी की टहनियाँ भी देखी जाती हैं जो वर्षा की संभावना का पता लगाने में मदद करती हैं।

सरहुल नृत्य:

सरहुल नृत्य भी इस उत्सव का अहम हिस्सा है, जिसमें स्थानीय लोग चावल से बनाये गये ‘हांडिया’ पीते हैं और फिर साल फुल (सारजोम बाहा) लगाते हैं। इसके बाद उन्हें जायराथान के आखड़ा में नृत्य करते हुए देखा जा सकता है।

उत्सव का समापन:
सरहुल उत्सव का समापन खुशियों और आनंद के साथ होता है। यह एक सामूहिक रूप से एकत्रित होकर नृत्य, गाने और उत्साह से भरी शोभा यात्रा में समाप्त होता है। आदिवासी समुदाय के सदस्य इस अवसर पर एक-दूसरे को बधाई देकर खुशियों के इस मौके का आनंद लेते हैं। इस उत्सव में समुदाय की एकता और समरसता का परिचय होता है, जो लोगों को एक-दूसरे के साथ मिलकर उत्सव की शांति और समृद्धि का आनंद लेने की भावना देता है।समृद्धि और सौभाग्य की प्रार्थना:
सरहुल के उत्सव में लोग समृद्धि, सौभाग्य और खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। यह एक समृद्ध और समृद्धि भरी वर्ष की शुरुआत का प्रतीक होता है जो लोगों के जीवन में नए आरंभ की शुरुआत के साथ एक नया संघर्ष भी लेकर आता है। इसके साथ ही, यह उत्सव धरती माता की पूजा का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है जिससे लोग प्राकृतिक संतुलन और समृद्धि का आभास करते हैं।सरहुल का महत्व:

सरहुल उत्सव आदिवासी समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण पर्व है जो समृद्धि, सौभाग्य और खुशहाली की प्रार्थना के साथ ही प्राकृतिक संतुलन और पर्वतीय परिदृश्य का आनंद लेने का अवसर प्रदान करता है। यह एक ऐसा मौका है जिसमें लोग अपनी परंपराओं को जीवंत रखने के साथ ही सामूहिक एकता और समरसता का भी पाठ पढ़ते हैं। सरहुल का उत्सव उत्साह और उल्लास से भरा होता है जो लोगों को एक-दूसरे के साथ मिलकर उत्सव की खुशियों का आनंद लेने का अवसर प्रदान करता है।

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