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Monday, May 20, 2024

लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिला को भी मिलेगा भरण-पोषण: एमपी हाईकोर्ट

जबलपुर (अपडेट: 07/04/2024)। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिला भी अलग होने पर भरण-पोषण की हकदार है। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए यह निर्णय दिया।

मामला बालाघाट जिला अदालत के एक आदेश से जुड़ा है, जिसमें शैलेश बोपचे नामक व्यक्ति को उसकी लिव-इन पार्टनर को 1,500 रुपये मासिक भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था। बोपचे ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

महिला ने दिए प्रमाण, कोर्ट ने किया निर्णय वैध ठहराया

सुनवाई के दौरान महिला की ओर से यह दलील दी गई कि वह बोपचे के साथ लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह रही और उनके एक बच्चा भी है। अतः उसे भरण-पोषण का हक है।

जस्टिस जी.एस. आहलूवालिया की एकलपीठ ने महिला द्वारा प्रस्तुत किए गए सबूतों को देखते हुए निचली अदालत के आदेश को वैध करार दिया। बोपचे का यह तर्क खारिज कर दिया गया कि चूंकि वे विधिवत विवाहित नहीं थे, इसलिए महिला भरण-पोषण की हकदार नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से भी मिली मदद

फैसले में हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पिछले कुछ आदेशों का भी हवाला दिया, जिनमें लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को भरण-पोषण का अधिकार माना गया है। कोर्ट ने कहा कि चूंकि यह स्पष्ट था कि दोनों ने लंबे समय तक पति-पत्नी जैसा रिश्ता निभाया और महिला से उनकी संतान भी है, इसलिए उसे भरण-पोषण मिलना चाहिए।

बोपचे की ओर से यह भी तर्क दिया गया था कि महिला ने उसके खिलाफ दुष्कर्म का मामला भी किया था, लेकिन उसे बरी कर दिया गया था। हालांकि, यह तर्क भी कोर्ट ने नहीं माना और उसकी याचिका को खारिज कर दिया।

इस तरह हाईकोर्ट ने लिव-इन में रहने वाली महिलाओं के हितों की रक्षा की है। फैसले से स्पष्ट है कि केवल विधिवत विवाह न होने की स्थिति में भी अगर किसी जोड़े ने लंबे समय तक साथ रहकर संतान भी प्राप्त की हो, तो महिला को भरण-पोषण का हक होगा।

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